✨ पूजा संग्रह ✨
सभी प्रमुख हिंदू पूजाओं का संपूर्ण संग्रह एक ही स्थान पर – विधि, मंत्र और महत्व सहित।

॥ स्वस्तिवाचन और पौराणिकश्लोक ॥
स्वस्तिवाचन एक वैदिक मंत्रोच्चारण है,जो मंगल आशीर्वाद के लिए किया जाता है। इसमें मंत्रोच्चारण के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न की जाती है
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॥ सत्यनारायण पूजनं ॥
सत्यनारायण पूजा भगवान विष्णु को समर्पित एक धार्मिक अनुष्ठान है जो घर में सुख-समृद्धि लाने और मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए की जाती है
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॥ गणेश पूजनं ॥
श्रद्धापूर्वक गणपति की आराधना करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
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॥ रविषष्ठि (छठ) पूजनम् ॥
छठ पूजा व्रत की पवित्र कथा और नियम—सूर्य देव और छठ माता की पूजा के लिए संपूर्ण मार्गदर्शन।
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॥ चतुर्लिंगतो भद्र पूजन ॥
प्रत्येक शिवा अर्चन पूजन रुद्राभिषेक असंख्य रुद्र महादेव शिव पार्थिव पूजन और अन्य सभी शिव पूजा मे र्लिंगतोभद्र वेदी की रचना की जाती हैं।
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॥ अधि देवता प्रत्यधि देवता पूजन ॥
अधि देवता ग्रह की आत्मा से जुड़े देवता हैं, और प्रत्यधि देवता उसके काम और प्रभाव को संचालित करने वाले देवता हैं।
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॥ रुद्राभिषेक पूजन ॥
रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने वाली पूजा है, जिसमें शिवलिंग का पवित्र द्रव्यों से अभिषेक कर शांति, समृद्धि और मोक्ष की कामना की जाती है।
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॥ कलश पूजन ॥
कलश पूजन में जल से भरे कलश को देवी-देवताओं का आसन मानकर प्रतिष्ठित किया जाता है। यह पूजन मंगल, समृद्धि और शुभ ऊर्जा का आह्वान करता है।
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॥ पुण्याहवाचन ॥
पुण्यावाचन पूजा शुद्धिकरण और मंगल आरंभ की विधि है, जो वातावरण और मन को पवित्र बनाती है।
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॥ पञ्चदेवता पूजन ॥
पंचदेवता पूजा में गणेश, विष्णु, शिव, देवी और सूर्य की सामूहिक आराधना की जाती है, जो जीवन में संतुलन, सुख और समृद्धि लाती है।
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॥ नवग्रहपूजनम् ॥
नवग्रह पूजा नौ ग्रहों की शांति और आशीर्वाद के लिए की जाती है। यह पूजा ग्रह दोषों को दूर कर जीवन में सौभाग्य, स्वास्थ्य और सफलता लाती है।
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॥ षोडशमातृकापूजनम् ॥
षोडशमात्रिका पूजा सोलह मातृ शक्तियों की आराधना है, जो साधक को शक्ति, समृद्धि और संरक्षण प्रदान करती है।
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॥ चतुष्षष्टि योगिनीपूजनम् ॥
चतुषष्टि योगिनी पूजा में देवी की 64 योगिनियों की उपासना की जाती है, जो साधक को शक्ति, सिद्धि और दिव्य कृपा प्रदान करती हैं।
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॥ क्षेत्रपालपूजनम् ॥
क्षेत्रपाल पूजा में उस स्थान या क्षेत्र के रक्षक देवता की आराधना की जाती है, जो भूमि, परिवार और स्थान की रक्षा करते हैं।
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॥ सप्तघृतमातृकापूजनम् ॥
सप्तघृतमात्रिका पूजा सात मातृ शक्तियों की आराधना है, जो भक्त को शक्ति, समृद्धि और रक्षा प्रदान करती हैं।
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॥ वास्तुमंडलपूजनम् ॥
वास्तु पूजा स्थान की शुद्धि और शुभता के लिए की जाती है, जिससे घर में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
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॥ सर्वतोभद्रमंडलपूजनम् ॥
सर्वतोभद्र मंडल पूजा एक विशिष्ट वैदिक विधि है जिसमें सर्वतोभद्र मंडल की स्थापना कर देवताओं, नक्षत्रों और शक्तियों की आराधना की जाती है।
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॥ हवन विधि ॥
हवन पवित्र अग्नि में आहुति देकर शुद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का वैदिक अनुष्ठान है।
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॥ श्री सरस्वती पूजा ॥
श्री सरस्वती पूजा, बुद्धि और ज्ञान की देवी की उपासना हेतु की जाने वाली संपूर्ण पूजा विधि है। इसमें मंत्र, ध्यान, आवाहन, स्नान, नैवेद्य, आरती, हवन और शान्ति पाठ सम्मिलित हैं।
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॥ नींव पूजन विधि (शिलान्यास) ॥
नींव पूजन विधि (शिलान्यास) किसी भी भवन, मंदिर या निर्माण कार्य के आरंभ से पूर्व किया जाने वाला महत्वपूर्ण वैदिक संस्कार है। इस पूजा द्वारा वास्तु दोष निवारण, स्थिरता, समृद्धि और निर्माण कार्य की निर्विघ्न पूर्णता के लिए देवताओं का आवाहन किया जाता है।
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॥ मूलशान्ति विधि (सतैसा) ॥
मूलशान्ति विधि (सतैसा) जन्म कुंडली में मूल नक्षत्र दोष, ग्रह दोष या जन्मजनित अशुभ प्रभावों की शांति हेतु किया जाने वाला महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है।
Read More →पूजा की आवश्यक सामग्री / Puja Essentials
इन वस्तुओं का प्रयोग ऊपर वर्णित अनुष्ठान में परंपरागत रूप से किया जाता है।
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