मूलशान्ति विधिः (सतैसा)

मिट्टी के नये घड़े में सत्ताइस घाट का या २७ कुँए का पानी रखें। घड़े के भीतर २७ घाट की मिट्टी एवं २७ पेड़ की पत्ती डाल दें। घड़े के अन्दर सर्वौषधि व पंचरत्न भी छोड़ दे। एक सूप या बाँस की डलिया में कम्बल का टुकड़ा बिछाकर २७ छिद्र वाला घड़ा तथा २७ घाट के पानी वाला घड़ा भी रख लें।

ठाकुर (हेल्पर) इस टोकरी को उठाकर मंडप से बाहर ले जाय तथा शिशु पिता (क्षौर कर्म कराया हुआ), शिशु माता व शिशु को २७ घाट के पानी को २७ छिद्र के घड़े मे डालकर स्नान कराये। ब्राह्मण निम्नलिखित मंत्र बोले।

घट-स्नान

ॐ देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्यां। सरस्वत्यै वाचो यन्तुर्यन्त्रिये दधामि बृहस्पतेष्ट्वा साम्राज्येनाभिषिञ्चामि।

ॐ देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्यां। सरस्वत्यै वाचो यन्तुर्यन्त्रैणाग्नेः साम्राज्येना- भिषिञ्चामि।।

ॐ देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्यां।

अश्विनोर्भैषज्येन तेजसे ब्रह्मवर्चसायाभिषिञ्चामि सरस्वत्यै ।।

भैषज्येन वीर्या यान्नाद्यायाभिषिञ्चामीन्द्रस्येन्द्रियेण वलाय श्रियै यशसेऽभिषिञ्चामि ।

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष गुँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वेदेवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्व गुँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ।।

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।

शुद्ध-स्नान

शिशु-माता-पिता व शिशु शुद्ध स्नान करें । शिशु-पिता धोती-दुपट्टा धारण कर पाँव में महावर लगाकर पूजन मण्डप में आ जाय व शुद्धासन पर पूर्वाभिमुख बैठकर आचमन व पवित्रीकरण निम्नवत करें ।

शुद्ध आसन पर बैठकर आचमन करें-

ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः।

‘गोविन्दाय नमः’ कहकर होठ पोंछ लें और ‘हृषीकेशाय नमः’ बोलकर हाथ धो लें ।

पवित्रीकरण

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

आसन शुद्धि

ॐ पृथिवी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता । त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम् ॥

तिलक

चंदनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनं। आपदां हरते नित्यं लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा।।

पवित्री धारण

ॐ पवित्रेस्थो वैष्णव्यौ सवितुर्व्वः प्रसवऽ उत्पुनाम्म्यच्छिद्द्रेण पवित्रेण सूर्य्यस्य रश्मिभिः। तस्यते पवित्रपते पवित्रपूतस्य यत्कामः पुनेतच्छकेयम् ॥

कुशा की पवित्री को दाहिने हाथ की अनामिका में धारण करे

अखंड दीपक

भो दीप देव-रूपस्त्वं कर्मसाक्षि ह्यविघ्नकृत । यावत् कर्म-समाप्तिः स्यात् तावत् त्वं सुस्थिरो भवः॥

👉 कृपया क्रम से नीचे दिए गए चरणों का पालन करें। प्रत्येक चरण पर क्लिक करके पूजा विधि पढ़ें और करें।
  1. स्वस्तिवाचन एवं सङ्कल्प

पृथिवी-पूजन

“ॐ पृथिव्यै नमः” कहते हुए तीन बार पृथिवी पर जल छोड़ें तथा पंचोपचार पूजन करें ।
  1. गौरी गणेश पूजा
१- वरुण कलश, २- षोडश मातृका कलश, ३- सप्तघृत मातृका कलश, ४- नवग्रह कलश का स्थापन व पूजन करे
  1. कलश पूजा
  2. षोडश मातृका पूजन
  3. सप्त घृत-मातृका पूजन
  4. नवग्रह पूजा

प्रधान पीठ-निर्माण

एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर रोली व हल्दी बुकनी से २४ दल का कमल बनाएं ।

चौकी के चारो पावा में एक-एक बाँस की कईन (छड़ी) तथा केले का पत्ता बाँधें, चारो छड़ी में ऊपर लाल वस्त्र बाँधकर चौकी के ऊपर चाँदनी बाँध कर मण्डप बना दें ।

चौकी पर ताँबे का कलश स्थापित करें। कलश की स्थापना एवं पूजन निर्धारित विधि के अनुसार करें।

जिस नक्षत्र में शिशु का जन्म हुआ हो, उसी नक्षत्र के देवताओं का प्रतिमा में विधिपूर्वक आवाहन एवं पूजन करें। तत्पश्चात् उस नक्षत्र से संबंधित २४ देवताओं का दिक्पाल सहित २४ दल कमल पर आवाहन एवं प्रतिष्ठा करें।

  1. अश्लेषा नक्षत्र में देवों का आवाहन

  2. मघा नक्षत्र में देवों का आवाहन

  3. ज्येष्ठा नक्षत्र में देवों का आवाहन

  4. मूल नक्षत्र में देवों का आवाहन

  5. अश्विनी नक्षत्र में देवों का आवाहन

  6. रेवती नक्षत्र में देवों का आवाहन

प्रधान देवता पूजन

प्रार्थना

ॐ पूजां गृहणीत यद् दत्तं सर्वदा मे प्रसीदत । क्षेमकर्तारः शान्तिकर्तारः तुष्टिकर्तारः पुष्टिकर्तारः वरदा भवन्तु ।

  1. हवन

नमस्कार

नमस्ते नारायण देव नमस्ते भक्तवत्सल। त्राहि मां भवसागरात् संसारार्णवपातितम्॥

नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च। जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः॥

विसर्जन

यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय पार्थिवीम्। इष्टकामप्रसिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥

गच्छ गच्छ परं स्थानं स्वस्थानं परमेश्वर। पूजाकाले पुनरागच्छ यावत् तिष्ठ सुखं मम॥

शान्ति पाठ

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

पूजा की आवश्यक सामग्री / Puja Essentials

इन वस्तुओं का प्रयोग ऊपर वर्णित अनुष्ठान में परंपरागत रूप से किया जाता है।

बाँस रहित धूप कोन

पूजा और ध्यान के दौरान सुगंध के लिए सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले धूप कोन।

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सुगंधित अगरबत्ती (विविध सुगंध)

पूजा के समय वातावरण को सुगंधित रखने के लिए उपयोग की जाने वाली अगरबत्ती।

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कपूर सुगंधित तिल का पूजा तेल

दीया जलाने के लिए पूजा में उपयोग किया जाने वाला कपूर सुगंधित तिल का तेल।

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कपूर की गोलियाँ (Camphor)

पूजा, हवन और आरती के दौरान कपूर जलाने के लिए उपयोग की जाने वाली कपूर की गोलियाँ।

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प्रसाद दाना (सकरिया)

पूजा और भोग के लिए प्रसाद रूप में अर्पित की जाने वाली सकरिया।

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सूती दीया बत्ती (Jyot Batti)

दीपक और दीया प्रज्वलन के लिए पूजा और आरती में उपयोग की जाने वाली सूती बत्ती।

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पीतल का अखंड ज्योति दीया

घी या तेल से दीपक प्रज्वलन के लिए पूजा और आरती में उपयोग किया जाने वाला पीतल का दीया।

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पंचमुखी रुद्राक्ष जप माला (108 मनके)

जप, ध्यान और पूजा के दौरान मंत्र जाप के लिए उपयोग की जाने वाली रुद्राक्ष माला।

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श्री सत्यनारायण स्वामी फोटो फ्रेम

घर या पूजा स्थल में दर्शन और पूजा के लिए उपयोग की जाने वाली श्री सत्यनारायण स्वामी की छवि।

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पूजा आसन

पूजा, जप और ध्यान के समय बैठने के लिए उपयोग किया जाने वाला आसन।

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पूजा घंटी (Ghanti)

पूजा और आरती के समय ध्वनि के माध्यम से ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग की जाने वाली घंटी।

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इलेक्ट्रिक कपूर दानी (गणेश-ॐ डिजाइन)

पूजा, आरती एवं ध्यान के समय कपूर प्रज्वलन हेतु उपयोग की जाने वाली विद्युत कपूर दानी। यह सुगंध प्रसार के साथ नाइट लैंप के रूप में भी कार्य करती है तथा घर, मंदिर एवं पूजा कक्ष में सकारात्मक वातावरण बनाती है।

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सूती फूल बत्ती (हस्तनिर्मित)

दीपक एवं दीया प्रज्वलन हेतु उपयोग की जाने वाली हस्तनिर्मित सूती फूल बत्ती। यह पूजा, आरती, नवरात्रि एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में नियमित रूप से प्रयुक्त होती है तथा स्थिर व शुद्ध ज्योति प्रदान करती है।

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