अधि देवता और प्रत्यादि देवता

१.शिव (सूर्य के दायें भाग में)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्द्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् । ॐ एह्येहि विश्वेश्वरनस्त्रिशूलकपालखट्वाङ्गधरेण सार्धम् । लोकेश यक्षेश्वर यज्ञसिद्ध्यै गृहाण पूजां भगवन् नमस्ते ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः ईश्वराय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

२.उमा (चन्द्रमा के दायें भाग में)

ॐ श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पत्न्यावहोरात्रो पार्श्वे नक्षत्राणि रूपमश्विनौ व्यात्तम्। इष्णन्निषाणामुम्मऽइषाणसर्वलोकम्मऽइषाण। ॐ हेमाद्रितनयां देवीं वरदां शंकरप्रियाम् । लम्बोदरस्य जननीमुमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः उमायै नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

३.स्कन्द (मंगल के दायें भाग में)

ॐ यदक्रन्दः प्रथमं जायमानः उद्यन्त्समुद्रादुत वा पुरीषात्। श्येनस्य पक्षा हरिणस्य बाहूऽउपस्तुत्यं महिजातन्ते अर्वन् ।। ॐ रुद्रतेजः समुत्पन्नं देवसेनाग्रगं विभुम् । षण्मुखं कृत्तिकासूनुं स्कन्दमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः स्कन्दाय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

४.विष्णु (बुध के दायें भाग में)

ॐ विष्णोरराटमसि विष्णोः श्नप्त्रेस्त्थो विष्णोः स्यूरसि विष्णोर्ध्र्रुवोसि वैष्णवमसि विष्णवे त्वा ।। ॐ देवदेवं जगन्नाथं भक्तानुग्रहकारकम् । चतुर्भुजं रमानाथं विष्णुमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः विष्णवे नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

५.ब्रह्मा (बृहस्पति के दायें भाग में)

ॐ ब्रह्म यज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेनऽआवः। सबुध्न्या उपमाऽअस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसश्च विवः।। ॐ कृष्णाजिनाम्बरधरं पद्मसंस्थं चतुर्मुखम् । वेदाधारं निरालम्बं विधिमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः ब्रह्मणे नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

६. इन्द्र (शुक्र के दायें भाग में)

ॐ सजोषा इन्द्र सगणो मरुद्भिः सोमम्पिब वृत्रहा शूर विद्वान् जहि शत्रूँरपमृधोनुदस्वाथाभयङ्कृणुहि विश्वतो नमः ।। ॐ देवराजं गजारुढं शुनासीरं शतक्रतुम् । वज्रहस्तं महाबाहुमिन्द्रमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः इन्द्राय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

७. यम (शनि के दायें भाग में)

ॐ यमाय त्वांगिरस्वते पितृमते स्वाहा धर्माय स्वाहा धर्मः पित्रे ।। ॐ धर्मराजं महावीर्यं दक्षिणादिक्पतिं प्रभुम् । रक्तेक्षणं महाबाहुं यममावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः यमाय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

८. काल (राहु के दायें भाग में)

ॐ कार्षिरसि समुद्रस्य त्वाक्षित्याऽउन्नयामि समापोऽअद्भिरग्मतसमोषधी-भिरोषधीः ।। ॐ अनाकारमन्ताख्यं वर्तमानं दिने-दिने। कलाकाष्ठादिरुपेण कालमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवः स्वः कालाय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

९. चित्रगुप्त (केतु के दायें भाग में)

ॐ चित्रावसो स्वस्ति ते पारमशीय ।। ॐ धर्मराजसभासंस्थं कृताकृत विवेकिनम् । आवाहये चित्रगुप्तं लेखनीपत्रहस्तकम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः चित्रगुप्ताय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

अधि देवता और प्रत्यादि देवता क्या है?

१.अग्नि(सूर्य के बायें)

ॐ अग्निं दूतं पुरो दधे हव्यवाहमुपब्रुवे देवाँ२ ऽआसादयादिह ।। ॐ रक्तमाल्याम्बर धरं रक्तपद्मासनस्थितम् । वरदाभयदं देवमग्निमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः अग्नये नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

२.अप् (जल) - (चन्द्रमा के बायें)

ॐ आपो हिष्ठा मयोभुवस्तानऽऊर्जे दधातन महेरणाय चक्षसे यो वः शिवतमो रसस्तस्य भाजयतेह नः उशतीरिव मातरः। तस्माऽअरङ्गमामवो यस्य क्षयाय जिन्वथ आपो जनयथा च नः।। ॐ आदिदेवसमुद्भूतजगच्छुद्धिकराः शुभाः। ओषध्याप्यायनकरा अप आवाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः अद्भ्यो नमः, इहागच्छत, इह तिष्ठत ।

३.पृथ्वी (मंगल के बायें)

ॐ स्योना पृथिवी नो भवानृक्षरा निवेशनी यच्छा नः शर्म स प्रथाः।। ॐ शुक्लवर्णां विशालाक्षीं कूर्मपृष्ठोपरिस्थिताम् । सर्वशस्याश्रयां देवीं धरामावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः पृथिव्यै नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ।

४.विष्णु (बुध के बायें)

ॐ विष्णोरराटमसि विष्णोः श्नप्त्रेस्त्थो विष्णोः स्यूरसि विष्णोर्ध्र्रुवोसि वैष्णवमसि विष्णवे त्वा।। ॐ शङ्खचक्रगदापद्महस्तं गरुडवाहनम् । किरीटकुण्डलधरं विष्णुमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः विष्णवे नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ।

५.इन्द्र (बृहस्पति के बायें)

ॐ त्रातारमिन्द्रमवितारमिन्द्रᳪ हवे हवे सुहव ᳪ शूरमिन्द्रम्, ह्वायामि शक्रम्पुरुहूतमिन्द्र ᳪ स्वस्ति नो मघवा धात्विन्द्रः।। ॐ ऐरावतगजारुढ़ं सहस्राक्षं शचीपतिम् । वज्रहस्तं सुराधीशमिन्द्रमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः इन्द्राय नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

६.इन्द्राणी(शुक्र के बायें)

ॐ अदित्यैरास्नासीन्द्राण्याऽउष्णीषः पूषासि धर्मायदीष्व।। ॐ प्रसन्नवदनां देवीं देवराजस्य वल्लभाम् । नानालङ्कारसंयुक्तां शचीमावाहयाम्यहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः इन्द्राण्यै नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ।

७.प्रजापति (शनि के बायें)

ॐ प्रजापते न त्वदेतान्यन्न्यो विश्वारूपाणि परिता बभूव। यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नोऽस्तु वय ᳪ स्याम पतयो रयीणाम् ।। ॐ आवाहयाम्यहं देव देवेशं च प्रजापतिम् । अनेकव्रतकर्तारं सर्वेषां च पितामहम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः प्रजापतये नमः, प्रजापतिमावाहयामि,स्थापयामि ।

८.सर्प (राहु के बायें)

ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु येऽअन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।। ॐ अनन्ताद्यान् महाकायान् नानामणिविराजितान् । आवाहयाम्यहमं सर्पान् फणासप्तकमण्डितान् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः सर्पेभ्यो नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

९.ब्रह्मा (केतु के बायें)`,

ॐ ब्रह्म यज्ञानम्प्रथमम्पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेनऽआवः सबुध्न्याऽउपमाऽअस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः।। ॐ हंसपृष्ठसमारुढ़ं देवतागण पूजितम् । आवाहयाम्यहं देवं ब्रह्माणं कमलासनम् ।।

ॐ भूर्भुवःस्वः ब्रह्मणे नमः, इहागच्छ, इह तिष्ठ ।

षोडशोपचारैः पूजनम्

आसनार्थेऽक्षतान समर्पयामि । पादयोः पाद्यं समर्पयामि । हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि । आचमनं समर्पयामि । पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि । शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि । स्नानाङ्गाचमनं समर्पयामि । वस्त्रम् समर्पयामि । आचमनं समर्पयामि । यज्ञोपवीतं समर्पयामि । आचमनं समर्पयामि । उपवस्त्रं समर्पयामि । गन्धं समर्पयामि । अक्षतान समर्पयामि । पुष्पमालां समर्पयामि । नानापरिमलद्रव्याणि समर्पयामि । धूपमाध्रापयामि । दीपं दर्शयामि । हस्तप्रक्षालनम् । नैवेद्यं समर्पयामि । आचमनीयं समर्पयामि । मध्ये पानीयम् उत्तरापोशनं च समर्पयामि । ताम्बूलं समर्पयामि । पूगीफलं समर्पयामि । कृतायाः पूजायाः पाड्गुण्यार्थे द्रव्यदक्षिणां समर्पयामि । मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि । अनया पूजया गणपत्यादि पञ्चदेवता: प्रीयन्ताम् न मम ।

पूजा की आवश्यक सामग्री / Puja Essentials

इन वस्तुओं का प्रयोग ऊपर वर्णित अनुष्ठान में परंपरागत रूप से किया जाता है।

बाँस रहित धूप कोन

पूजा और ध्यान के दौरान सुगंध के लिए सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले धूप कोन।

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सुगंधित अगरबत्ती (विविध सुगंध)

पूजा के समय वातावरण को सुगंधित रखने के लिए उपयोग की जाने वाली अगरबत्ती।

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कपूर सुगंधित तिल का पूजा तेल

दीया जलाने के लिए पूजा में उपयोग किया जाने वाला कपूर सुगंधित तिल का तेल।

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कपूर की गोलियाँ (Camphor)

पूजा, हवन और आरती के दौरान कपूर जलाने के लिए उपयोग की जाने वाली कपूर की गोलियाँ।

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प्रसाद दाना (सकरिया)

पूजा और भोग के लिए प्रसाद रूप में अर्पित की जाने वाली सकरिया।

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सूती दीया बत्ती (Jyot Batti)

दीपक और दीया प्रज्वलन के लिए पूजा और आरती में उपयोग की जाने वाली सूती बत्ती।

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पीतल का अखंड ज्योति दीया

घी या तेल से दीपक प्रज्वलन के लिए पूजा और आरती में उपयोग किया जाने वाला पीतल का दीया।

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पंचमुखी रुद्राक्ष जप माला (108 मनके)

जप, ध्यान और पूजा के दौरान मंत्र जाप के लिए उपयोग की जाने वाली रुद्राक्ष माला।

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श्री सत्यनारायण स्वामी फोटो फ्रेम

घर या पूजा स्थल में दर्शन और पूजा के लिए उपयोग की जाने वाली श्री सत्यनारायण स्वामी की छवि।

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पूजा आसन

पूजा, जप और ध्यान के समय बैठने के लिए उपयोग किया जाने वाला आसन।

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पूजा घंटी (Ghanti)

पूजा और आरती के समय ध्वनि के माध्यम से ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग की जाने वाली घंटी।

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इलेक्ट्रिक कपूर दानी (गणेश-ॐ डिजाइन)

पूजा, आरती एवं ध्यान के समय कपूर प्रज्वलन हेतु उपयोग की जाने वाली विद्युत कपूर दानी। यह सुगंध प्रसार के साथ नाइट लैंप के रूप में भी कार्य करती है तथा घर, मंदिर एवं पूजा कक्ष में सकारात्मक वातावरण बनाती है।

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सूती फूल बत्ती (हस्तनिर्मित)

दीपक एवं दीया प्रज्वलन हेतु उपयोग की जाने वाली हस्तनिर्मित सूती फूल बत्ती। यह पूजा, आरती, नवरात्रि एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में नियमित रूप से प्रयुक्त होती है तथा स्थिर व शुद्ध ज्योति प्रदान करती है।

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