✨ स्तोत्र संग्रह ✨
सभी स्तुतियों का संग्रह एक ही स्थान पर - शिव, विष्णु, दुर्गा आदि।

॥ शिवतांडवस्तोत्र॥
जटाटवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्...

॥ देवी दुर्गे उमा॥
देवी दुर्गे उमा, विश्व जननी रमा, मातु तारा, एक जगदम्बा तेरा सहारा...

॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्॥
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय, नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय...

॥ शिवमहिम्नस्तोत्रम्॥
महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी, स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः...

॥ श्रीरुद्राष्टकम्॥
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्...

॥ श्रीशिवाष्टकं॥
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम्...

॥ शिवरामाष्टकम॥
शिवहरे शिवराम सखे प्रभो, त्रिविधताप-निवारण हे विभो...

॥ द्वादशज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्॥
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्...

॥ कालभैरवाष्टकम्॥
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्...

॥ महाकालभैरवाष्टकम्॥
यं यं यं यक्षरूपं दशदिशिविदितं भूमिकम्पायमानं...

॥ श्री भगवती स्तोत्रम्॥
जय भगवति देवी नमो वरदे, जय पापविनाशिनी बहुफलदे...

॥ श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्॥
निशुम्भशुम्भमर्दिनीं , प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी...

॥ महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्॥
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते...

॥ श्री भवान्यष्टकम्॥
जय भगवति देवी नमो वरदे, जय पापविनाशिनी बहुफलदे...

॥ देव्यपराधक्षमापन स्तोत्रम्॥
न मत्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने...

॥ मधुराष्टकम्॥
अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं, गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्...

॥ भज गोविन्दम्॥
भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्, गोविन्दं भज मूढ़मते...

॥ श्री हरि स्तोत्रम्॥
जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालंशरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं...

॥ श्री रामाष्टकम्॥
भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् । स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम्...

॥ श्री राम स्तुति॥
नमामि भक्त वत्सलं कृपालु शील कोमलं भजामि ते पदांबुजं अकामिनां स्वधामदं...

॥ श्री हनुमान चालीसा॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर...

॥ श्री बजरंग बाण॥
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी...

॥ सूर्याष्टकम्॥
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥ सूर्याष्टकम् का पाठ आरोग्य, दीर्घायु और सफलता प्रदान करने वाला माना गया है।...

॥ नीलकण्ठ स्तोत्रम्॥
हे नीलकण्ठ भगवान शिव को समर्पित यह शक्तिशाली स्तोत्र कष्टों का नाश करता है और भय, रोग तथा बाधाओं से रक्षा प्रदान करता है।...

॥ शिव मृत्युंजय स्तोत्रम्॥
ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन — भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरूप की यह स्तुति भय, रोग, संकट और अकाल मृत्यु के नाश का भाव प्रकट करती है।

॥ पुरुष सूक्तम्॥
सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् — ऋग्वेद का यह प्रसिद्ध वैदिक सूक्त सृष्टि, ब्रह्मांड और विराट पुरुष के दिव्य स्वरूप का गूढ़ वर्णन करता है। पुरुष सूक्तम् का पाठ ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक जागरण का मार्ग प्रशस्त करता है।
पूजा की आवश्यक सामग्री / Puja Essentials
इन वस्तुओं का प्रयोग ऊपर वर्णित अनुष्ठान में परंपरागत रूप से किया जाता है।
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