देवी दुर्गे उमा, विश्व जननी रमा...
देवी दुर्गे उमा, विश्व जननी रमा, मातु तारा,
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! (२) ॥१॥
हे देवी दुर्गा, उमा, विश्वजननी रमा और माता तारा—तू ही एक जगदम्बा है, सम्पूर्ण संसार का सहारा केवल तू ही है।
तू ही वैष्णवी मोह माया, तूने सारे जग को बनाया।
चरण कमलों में माँ, रहता मस्तक नवा, यह हमारा।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥२॥
तू ही वैष्णवी रूप में मोह-माया है और तूने ही समस्त संसार की रचना की है। हे माँ, हमारा मस्तक सदा तेरे चरणकमलों में नतमस्तक रहता है—एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
शैलजा स्कन्द माता भवानी, पार्वती भद्रकाली मृडाणी।
सर्व बुद्धि प्रदे, अष्ट सिद्धि वर दे, त्रिपुरारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥३॥
हे शैलजा, स्कन्दमाता, भवानी, पार्वती, भद्रकाली और मृडाणी—तू ही समस्त बुद्धि प्रदान करने वाली है और अष्ट सिद्धियों का वर देने वाली है। हे त्रिपुरारि की शक्ति, एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
पुण्यवानों के घर सम्पदा तू, पापियों के भवन आपदा तू।
कुल की लज्जा तू ही, साधु श्रद्धा तू ही, गुण अपारा।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥४॥
पुण्यवानों के घर में तू ही संपदा बनकर विराजती है और पापियों के भवन में तू ही आपदा का रूप धारण करती है। कुल की लज्जा भी तू ही है, साधुओं की श्रद्धा भी तू ही है—तेरे गुण अपार हैं; एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
जिनके मुंडन की गले मालिका हैं, सृञ्जति सञ्जति तालिका हैं।
रूप विकराली के, चण्डिके कालिके रुद्रतारा।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥५॥
जिनके मुंडों की गले में माला सुशोभित है और जिनके चरणों में ताल की झंकार होती है। जो विकराल रूप धारण करने वाली चण्डिका, कालिका और रुद्रतारा हैं—एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
मन वचन दोनों ने हार खाई, तेरा माया नहीं पार पाई।
क्या करें निर्वचन, वेद नेति कथन, करके हारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥६॥
मन और वाणी दोनों ही तेरी महिमा के सामने हार मान गए हैं, तेरी माया का पार नहीं पा सके। क्या किया जाए—वेद भी “नेति-नेति” कहकर कथन करते हुए थक गए; एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
हैं हज़ारों ही अपराध मेरा, हूँ अधम पातकी तो भी तेरा।
दुष्ट होवे यदा, तो भी माँ को सदा, पुत्र प्यारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥७॥
मेरे हजारों ही अपराध हैं, मैं अधम और पातकी हूँ, फिर भी मैं तेरा ही हूँ। जब पुत्र दुष्ट भी हो जाए, तब भी वह माँ को सदा प्रिय रहता है—एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
तेरी ज्योति से उदज्योति दिवाकर, तव प्रभा से सुशोभित सुधाकर।
देवी सेवक पर हो, दया की नजर का इशारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥८॥
तेरी ज्योति से ही सूर्य प्रकाशित होता है और तेरी प्रभा से चंद्रमा सुशोभित होता है। हे देवी, अपने सेवक पर कृपादृष्टि का संकेत कर—एकमात्र जगदम्बा, तेरा ही सहारा है।
देवी दुर्गे उमा, विश्व जननी रमा, मातु तारा,
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! ॥९॥
हे देवी दुर्गा, उमा, विश्वजननी रमा और माता तारा—तू ही एक जगदम्बा है, सम्पूर्ण संसार का सहारा केवल तू ही है।