॥ दिक्पालपूजनम् ॥
दिक्पाल आवाहन
१- पूर्व में- ॐ इन्द्राय नमः। इन्द्रमावाहायामि ।
२- अग्निकोण मे- ॐ अग्नये नमः। अग्निमावाहायामि ।
३- दक्षिण में- ॐ यमाय नमः। यममावाहायामि ।
४- नैर्ऋत्य कोण में- ॐ निर्ऋतये नमः। निर्ऋतिमावाहायामि ।
५- पश्चिम में- ॐ वरुणाय नमः। वरुणमावाहायामि ।
६- वायव्यकोण में- ॐ वायवे नमः। वायुमावाहायामि ।
७- उत्तर में- ॐ कुबेराय नमः। कुबेरमावाहायामि ।
८- ईशान कोण में-ॐ ईशानाय नमः। ईशानमावाहायामि ।
९- ईशान-पूर्व के बीच में- ॐ ब्रह्मणे नमः। ब्रह्माणमावाहायामि ।
१०- नैर्ऋत्य-पश्चिम के बीच में- ॐ अनन्ताय नमः। अनन्तमावाहायामि ।
प्रतिष्ठा
ॐ मनोजूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्व- रिष्टं यज्ञ गुँ समिमन्दधातु । विश्वेदेवा स इह मादयन्तामोम्प्रतिष्ठ ।
ॐ भूर्भुव: स्व: भगादि देवता: दिक्पालसहिता: सुप्रतिष्ठिता वरदा भवन्तु ।।
पूजा की आवश्यक सामग्री / Puja Essentials
इन वस्तुओं का प्रयोग ऊपर वर्णित अनुष्ठान में परंपरागत रूप से किया जाता है।
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