सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदायिनीम्।
सर्वदेवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम्।।:
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हिंदी अर्थ
मैं उस देवी का आवाहन करता हूँ
जो सम्पूर्ण लोक की जननी हैं,
जो सभी प्रकार के सुख प्रदान करने वाली हैं।
जो समस्त देवताओं में व्याप्त ईश्वरी स्वरूपा हैं—
उसी देवी को मैं आमंत्रित करता हूँ।
भावार्थ
यह मंत्र देवी को सर्वव्यापी, करुणामयी और सुखदायिनी शक्ति के रूप में स्मरण करता है।
इसके जप से साधक के जीवन में शांति, समृद्धि और दिव्य संरक्षण का भाव जागृत होता है।
वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां
हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम्।
भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहरब्रह्मादिभिः सेवितां
पार्श्वे पङ्कजशङ्खपद्मनिधिभिर्युक्तां सदा शक्तिभिः॥
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हिंदी अर्थ
मैं उस देवी को नमन करता हूँ जिनके हाथों में कमल है,
जिनका मुख प्रसन्न है, जो सौभाग्य और भाग्य प्रदान करने वाली हैं।
जो दोनों हाथों से अभय प्रदान करती हैं,
और अनेक प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं।
जो भक्तों की इच्छित फल प्रदान करने वाली हैं,
और हरि, हर तथा ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा सेवित हैं।
जिनके पार्श्व में पद्म, शंख और निधियाँ स्थित हैं,
और जो सदा शक्तियों से युक्त हैं।
भावार्थ
यह श्लोक देवी के सौम्य, ऐश्वर्यपूर्ण और वरदायी स्वरूप का स्मरण कराता है।
इसके पाठ से सौभाग्य, समृद्धि और भक्तों की कामनाओं की सिद्धि का भाव जागृत होता है।
या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्ष
गम्भीरावर्तनाभिस्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया ।
या लक्ष्मीर्दिव्यरूपैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः
सा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता ॥
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हिंदी अर्थ
जो पद्मासन पर विराजमान हैं, जिनकी कटि विस्तृत और नेत्र कमल-पत्र के समान विशाल हैं।
जिनकी गम्भीर नाभि, स्तनभार से झुकी हुई कटी तथा
श्वेत वस्त्र धारण किए हुए दिव्य स्वरूप है।
जो लक्ष्मी देवी दिव्य रूप से सुशोभित हैं,
मणियों से जड़े स्वर्ण कलशों द्वारा जिनका अभिषेक किया जाता है।
वे सदा कमल धारण करने वाली देवी
समस्त मंगलों से युक्त होकर मेरे घर में निवास करें।
भावार्थ
यह श्लोक माता लक्ष्मी के ऐश्वर्य, सौभाग्य और स्थिर समृद्धि प्रदान करने वाले स्वरूप का आवाहन करता है।
इसके पाठ से गृह में धन, शांति, पवित्रता और निरंतर मंगल का वास होने की भावना जागृत होती है।