गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्
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हिंदी अर्थ
मैं गजानन भगवान को नमन करता हूँ,
जिनकी सेवा भूतगण आदि करते हैं।
जो कपित्थ और जामुन जैसे प्रिय फलों का
आनंदपूर्वक भक्षण करते हैं।
जो माता उमा के पुत्र हैं
और शोक का नाश करने वाले हैं।
ऐसे विघ्नेश्वर के चरणकमलों को मैं प्रणाम करता हूँ।
भावार्थ
यह मंत्र भगवान गणेश के विघ्नहर्ता और शोकनाशक स्वरूप का स्मरण कराता है।
इसके जप से कार्यों में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं
और जीवन में शुभारंभ, प्रसन्नता तथा मानसिक शांति का संचार होता है।
ॐ गणानां त्वा गणपति (गूं) हवामहे
प्रियाणां त्वा प्रियपति (गूं) हवामहे
निधिनां त्वा निधिपति (गूं) हवामहे
वसो मम आहमजानि गर्भधमा त्वम जासि गर्भधम्।
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हिंदी अर्थ
ॐ, हम गणों के स्वामी गणपति को आह्वान करते हैं।
हम प्रियजनों के प्रिय स्वामी को आह्वान करते हैं।
हम निधियों के स्वामी को आह्वान करते हैं।
हे वसो (धन के स्वामी)! आप हमारे भीतर निवास करें।
जैसे गर्भ में जीवन सुरक्षित रहता है, वैसे ही
आप हमें संरक्षण प्रदान करें।
भावार्थ
यह वैदिक मंत्र भगवान गणपति को सर्वगणाध्यक्ष, समृद्धि के दाता और रक्षक रूप में स्मरण करता है।
इसके जप से कार्यों में सिद्धि, धन-समृद्धि और सुरक्षित आरंभ का भाव जागृत होता है।