सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते
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हिंदी अर्थ
हे समस्त मंगलों में श्रेष्ठ मंगल करने वाली देवी!
हे शिवे, सबके सभी प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली।
हे शरण देने वाली, त्र्यंबक की अर्धांगिनी गौरी,
हे नारायणी! आपको नमस्कार है।
भावार्थ
यह मंत्र देवी के करुणामयी और कल्याणकारी स्वरूप की स्तुति करता है।
इसके जप से साधक को शरण, संरक्षण और जीवन में मंगल तथा सिद्धि की अनुभूति होती है।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकराम्बुजा।
शुभदां सर्वभूतानां दुर्गा देवी नमोऽस्तु ते॥
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हिंदी अर्थ
हे दुर्गा देवी! आप सदा सिंहासन पर विराजमान हैं।
आपके करकमल कमल पुष्प पर स्थित हैं।
आप समस्त प्राणियों को शुभ फल प्रदान करने वाली हैं—
ऐसी देवी को मेरा नमस्कार है।
भावार्थ
यह मंत्र देवी दुर्गा के तेजस्वी, संरक्षक और कल्याणकारी स्वरूप का ध्यान कराता है।
इसके जप से भय, बाधा और नकारात्मकता दूर होती है,
तथा जीवन में सुरक्षा, शक्ति और शुभता का संचार होता है।
महिषासुरनिराशनं भक्तानां भयभञ्जनम् ।
सिंहवाहनसमायुक्तां दुर्गां देवीं नमाम्यहम् ॥
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हिंदी अर्थ
महिषासुर का संहार करने वाली,
भक्तों के भय का नाश करने वाली।
सिंह वाहन से युक्त उस दुर्गा देवी को
मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।
भावार्थ
यह मंत्र देवी दुर्गा के पराक्रमी और रक्षक स्वरूप की स्तुति करता है।
इसके जप से साधक के भीतर साहस, आत्मबल और भयमुक्ति का भाव जागृत होता है,
और जीवन की नकारात्मक शक्तियों का क्षय होता है।
नवदुर्गा महाशक्तिं त्रैलोक्यपरिपालिनीम् ।
शरणागतदीनार्तहरिणीं प्रणमाम्यहम् ॥
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हिंदी अर्थ
मैं नवदुर्गा स्वरूप महाशक्ति को नमन करता हूँ,
जो तीनों लोकों की रक्षा करने वाली हैं।
जो शरण में आए हुए दीन और पीड़ित भक्तों के
दुःखों को हरने वाली हैं।
भावार्थ
यह मंत्र नवदुर्गा के करुणामयी और संरक्षण देने वाले स्वरूप की स्तुति करता है।
इसके जप से साधक को शक्ति, सुरक्षा और संकटों से मुक्ति की अनुभूति होती है।