शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तुते ॥
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हिंदी अर्थ
हे दीपक की ज्योति! आप शुभ और कल्याण करने वाली हैं,
आप आरोग्य, धन और समृद्धि प्रदान करती हैं।
शत्रुओं की दुर्बुद्धि का नाश करने वाली उस दीप-ज्योति को
मैं नमस्कार करता हूँ।
भावार्थ
यह मंत्र दीप-ज्योति को अंधकार और नकारात्मकता के नाशक रूप में प्रणाम करता है।
इसके जप से जीवन में शुभता, स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक संतुलन की वृद्धि होती है।
आत्मज्योतिः प्रदीप्ताय, ब्रह्मज्योतिः नमोऽस्तुते।
ब्रह्मज्योतिः प्रदीप्ताय, गुरुज्योतिः नमोऽस्तुते।
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हिंदी अर्थ
आत्मा की ज्योति को प्रज्वलित करने वाली उस ब्रह्म-ज्योति को नमस्कार है।
ब्रह्म-ज्योति से प्रकाशित करने वाली उस गुरु-ज्योति को नमस्कार है।
भावार्थ
यह मंत्र आत्मा, ब्रह्म और गुरु—तीनों को एक ही दिव्य प्रकाश के रूप में स्मरण करता है।
यह सिखाता है कि गुरु-कृपा से ही आत्मज्ञान जागृत होता है और ब्रह्मतत्त्व की अनुभूति संभव होती है।
दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन: ।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तुते ॥
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हिंदी अर्थ
दीपक ही ज्योति स्वरूप परम ब्रह्म है,
दीपक ही ज्योति स्वरूप भगवान जनार्दन हैं।
हे संध्याकाल के दीपक!
आप मेरे समस्त पापों का नाश करें—आपको नमस्कार है।
भावार्थ
यह मंत्र दीप-ज्योति को ब्रह्म और ईश्वर का प्रत्यक्ष प्रतीक मानकर नमन करता है।
इसका पाठ करने से पापबुद्धि का क्षय होता है और जीवन में पवित्रता, प्रकाश व आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।