सम्पूर्ण एकादशी व्रतकथा

🪔 सभी एकादशी व्रत कथाएँ (सूची)

नीचे दी गई सूची में आप वर्षभर की सभी एकादशी व्रत कथाएँ पढ़ सकते हैं। जिस कथा को पढ़ना चाहें, उस पर क्लिक करें

  1. निर्जला एकादशी व्रतकथा - निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस व्रत को ‘भीम एकादशी’ भी कहा जाता है। शास्त्रों में इसे सभी एकादशियों में सर्वोत्तम और सर्वाधिक फलदायी बताया गया है। इस दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के अनुसार, भीमसेन जल और अन्न के बिना रह नहीं सकते थे, तब व्यास मुनि ने उन्हें केवल एक बार निर्जला एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। इस व्रत के प्रभाव से वर्षभर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है।

  2. योगिनी एकादशी व्रत कथा - योगिनी एकादशी व्रत कथानुसार, यह आषाढ़ कृष्ण एकादशी को किया जाता है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में कहा गया है कि इसके फलस्वरूप ८८,००० ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य मिलता है। कथा के अनुसार माली हेममाली ने श्रद्धा पूर्वक व्रत से अपने कोढ़ रोग का नाश किया और स्वस्थ जीवन पाया। इस कारण यह व्रत रोगों, पापों और दुःखों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

  3. देवशयनी एकादशी व्रत कथा - देवशयनी एकादशी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इसे ‘अषाढ एकादशी’ या ‘ज्येष्ठ एकादशी’ भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा (दिव्य निद्रा) में चले जाते हैं और उनके जागरण का समय देवोत्थान एकादशी पर होता है। इस व्रत को करने से पाप नष्ट होते हैं, धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, और मोक्ष की प्राप्ति की संभावना बढ़ती है। कथा में बताया गया है कि श्रद्धा और संयमपूर्वक इस व्रत का पालन करने से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और ईश्वर की कृपा मिलती है।

  4. कामिका एकादशी व्रत कथा - कामिका एकादशी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस व्रत को विशेष रूप से समृद्धि, ऐश्वर्य और पापों के नाश के लिए फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो श्रद्धा और संयम के साथ कामिका एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की असीम कृपा मिलती है और उनके सभी कार्य सिद्ध होते हैं। कथा में बताया गया है कि इस व्रत का पालन करने से परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और वैभव की वृद्धि होती है।

  5. पुत्रदा एकादशी व्रत कथा - पुत्रदा एकादशी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस व्रत का मुख्य लाभ पुत्र सुख की प्राप्ति और संतान के कल्याण के लिए माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो श्रद्धा और संयम के साथ पुत्रदा एकादशी का पालन करते हैं, उनके घर में संतान सुख, परिवार में शांति और समृद्धि आती है। कथा में बताया गया है कि इस व्रत से वंश वृद्धि होती है और संतान संबंधी सभी बाधाओं का नाश होता है।

  6. अजा एकादशी व्रत कथा - अजा एकादशी व्रत श्रावण या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से पाप नष्ट होते हैं और ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त होती है। अजा एकादशी का व्रत विशेष रूप से स्वास्थ्य, धन और मोक्ष प्राप्ति के लिए फलदायी माना गया है। कथा में बताया गया है कि श्रद्धा और संयमपूर्वक इस व्रत का पालन करने से जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

  7. परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा - परिवर्तिनी एकादशी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है और इसे करने से जीवन में नकारात्मक प्रभाव और पापों का नाश होता है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ परिवर्तिनी एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।

  8. इंदिरा एकादशी व्रत कथा - इंदिरा एकादशी व्रत श्रावण या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से पाप नष्ट होते हैं और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ इंदिरा एकादशी का पालन करते हैं, उनके जीवन में स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति आती है। इस व्रत से आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति भी संभव है।

  9. पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - पापांकुशा एकादशी व्रत श्रावण या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत का पालन करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट होते हैं और मनुष्य को ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा और संयम के साथ पापांकुशा एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

  10. रमा एकादशी व्रत कथा - रमा एकादशी व्रत श्रावण या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ रमा एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनके सभी कष्ट दूर होते हैं। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

  11. देवोत्थान एकादशी व्रत कथा - देवोत्थान एकादशी व्रत श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इसे ‘उत्थान एकादशी’ भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु का जागरण (योगनिद्रा से जागना) होता है और श्रद्धालुओं द्वारा किए गए व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयमपूर्वक देवोत्थान एकादशी का पालन करते हैं, उनके पाप नष्ट होते हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

  12. उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा - उत्पन्ना एकादशी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत पापों के नाश और धर्म-ध्यान की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ उत्पन्ना एकादशी का पालन करते हैं, उनके जीवन में स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस व्रत से आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति भी संभव है।

  13. मोक्षदा एकादशी व्रत कथा - मोक्षदा एकादशी व्रत श्रावण या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ मोक्षदा एकादशी का पालन करते हैं, उनके जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह व्रत विशेष रूप से मोक्ष की प्राप्ति और आत्मा की शुद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

  14. सफला एकादशी व्रत कथा - सफला एकादशी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत अत्यंत फलदायी है और इसे करने से पाप नष्ट होते हैं, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ सफला एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

  15. पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा - पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति के इच्छुक भक्तों के लिए फलदायी माना गया है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयमपूर्वक पौष पुत्रदा एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, सुख-शांति, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति में भी सहायक होता है।

  16. षटतिला एकादशी व्रत कथा - षटतिला एकादशी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि आती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयम के साथ षटतिला एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

  17. जया एकादशी व्रत कथा - “जया एकादशी व्रत श्रावण या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा और संयम के साथ जया एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

  18. विजया एकादशी व्रत कथा - विजया एकादशी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत का पालन करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा और संयमपूर्वक विजया एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता होती है।

  19. आमलकी एकादशी व्रत कथा - “आमलकी एकादशी व्रत फाल्गुन या चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से पाप नष्ट होते हैं और भक्त के जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति आती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयमपूर्वक आमलकी एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।

  20. पापमोचनी एकादशी व्रत कथा - पापमोचनी एकादशी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयमपूर्वक पापमोचनी एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति तथा मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।

  21. कामदा एकादशी व्रत कथा - कामदा एकादशी व्रत कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। कथा में बताया गया है कि जो श्रद्धा और संयमपूर्वक कामदा एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति में सहायक होता है।

  22. वरुथिनी एकादशी व्रत कथा - वरुथिनी एकादशी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा और संयमपूर्वक वरुथिनी एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति में भी सहायक होता है।

  23. मोहिनी एकादशी व्रत कथा - मोहिनी एकादशी व्रत कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा और संयमपूर्वक मोहिनी एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति में भी सहायक होता है।

  24. अचला एकादशी व्रत कथा - अचला एकादशी व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा और संयमपूर्वक अचला एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति में भी सहायक होता है।

पूजा की आवश्यक सामग्री / Puja Essentials

इन वस्तुओं का प्रयोग ऊपर वर्णित अनुष्ठान में परंपरागत रूप से किया जाता है।

बाँस रहित धूप कोन

पूजा और ध्यान के दौरान सुगंध के लिए सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले धूप कोन।

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सुगंधित अगरबत्ती (विविध सुगंध)

पूजा के समय वातावरण को सुगंधित रखने के लिए उपयोग की जाने वाली अगरबत्ती।

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कपूर सुगंधित तिल का पूजा तेल

दीया जलाने के लिए पूजा में उपयोग किया जाने वाला कपूर सुगंधित तिल का तेल।

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कपूर की गोलियाँ (Camphor)

पूजा, हवन और आरती के दौरान कपूर जलाने के लिए उपयोग की जाने वाली कपूर की गोलियाँ।

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प्रसाद दाना (सकरिया)

पूजा और भोग के लिए प्रसाद रूप में अर्पित की जाने वाली सकरिया।

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सूती दीया बत्ती (Jyot Batti)

दीपक और दीया प्रज्वलन के लिए पूजा और आरती में उपयोग की जाने वाली सूती बत्ती।

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पीतल का अखंड ज्योति दीया

घी या तेल से दीपक प्रज्वलन के लिए पूजा और आरती में उपयोग किया जाने वाला पीतल का दीया।

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पंचमुखी रुद्राक्ष जप माला (108 मनके)

जप, ध्यान और पूजा के दौरान मंत्र जाप के लिए उपयोग की जाने वाली रुद्राक्ष माला।

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श्री सत्यनारायण स्वामी फोटो फ्रेम

घर या पूजा स्थल में दर्शन और पूजा के लिए उपयोग की जाने वाली श्री सत्यनारायण स्वामी की छवि।

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पूजा आसन

पूजा, जप और ध्यान के समय बैठने के लिए उपयोग किया जाने वाला आसन।

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पूजा घंटी (Ghanti)

पूजा और आरती के समय ध्वनि के माध्यम से ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग की जाने वाली घंटी।

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इलेक्ट्रिक कपूर दानी (गणेश-ॐ डिजाइन)

पूजा, आरती एवं ध्यान के समय कपूर प्रज्वलन हेतु उपयोग की जाने वाली विद्युत कपूर दानी। यह सुगंध प्रसार के साथ नाइट लैंप के रूप में भी कार्य करती है तथा घर, मंदिर एवं पूजा कक्ष में सकारात्मक वातावरण बनाती है।

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सूती फूल बत्ती (हस्तनिर्मित)

दीपक एवं दीया प्रज्वलन हेतु उपयोग की जाने वाली हस्तनिर्मित सूती फूल बत्ती। यह पूजा, आरती, नवरात्रि एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में नियमित रूप से प्रयुक्त होती है तथा स्थिर व शुद्ध ज्योति प्रदान करती है।

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