जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता...
“जय वैष्णवी माता” त्रिकूट पर्वत पर विराजमान माता वैष्णो देवी के करुणामयी एवं शक्तिस्वरूप की प्रमुख आरती मानी जाती है।
माता वैष्णवी को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती—तीनों शक्तियों के समन्वित रूप के रूप में श्रद्धा से पूजित किया जाता है।
इस आरती में माता के दिव्य स्वरूप, चरणों से प्रवाहित पावन गंगा, तथा गुफा में स्थित अलौकिक उपस्थिति का भावपूर्ण वर्णन है।
यह दर्शाया गया है कि माता वैष्णवी अपने भक्तों को धैर्य, साहस और आंतरिक शक्ति प्रदान करती हैं।
यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि, वैष्णो देवी यात्रा, जगराता तथा नित्य देवी पूजन में श्रद्धा से गाई जाती है।
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता ।
हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता ॥
जय वैष्णवी माता..॥
शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी । गंगा बहती चरनन ज्योति जगे न्यारी ॥
जय वैष्णवी माता..॥
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ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे । सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे ॥
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जय वैष्णवी माता..॥
सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे । बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे ॥
जय वैष्णवी माता..॥
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भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे । ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे ॥
जय वैष्णवी माता..॥
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पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा ॥
जय वैष्णवी माता..॥
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जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे । उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे ॥
जय वैष्णवी माता..॥
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इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे ।कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे ॥
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता ।
हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता ॥
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जय वैष्णवी माता..॥
इस आरती के माध्यम से भक्त माता वैष्णवी से जीवन की बाधाओं के निवारण, मनोकामना पूर्ति और आत्मबल की प्रार्थना करता है।
भवन पर लहराते ध्वज, घंटा-नाद और पर्वतीय गुफा का उल्लेख यह संकेत देता है कि भक्ति का मार्ग श्रद्धा, तप और संकल्प से होकर जाता है।
आरती यह संदेश देती है कि माता वैष्णवी सच्चे संकल्प और विश्वास से आने वाले प्रत्येक भक्त की रक्षा करती हैं।
जो भक्त नियम, श्रद्धा और संयम के साथ माता की शरण में आता है, उसके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आती है।
नियमित रूप से “जय वैष्णवी माता” आरती का पाठ करने से मन में विश्वास, जीवन में साहस और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का विकास होता है।