जय पार्वती माता, जय पार्वती माता...
“जय पार्वती माता” माता पार्वती के करुणामयी, सौम्य एवं गृहस्थ जीवन को संरक्षण देने वाले स्वरूप की प्रमुख आरती मानी जाती है।
माता पार्वती को जगज्जननी, शक्ति स्वरूपा तथा भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।
आरती के पदों में माता के सती से पार्वती तक के दिव्य स्वरूप, उनके तप, त्याग और शक्ति का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।
यह दर्शाया गया है कि माता पार्वती केवल शक्ति की देवी नहीं, बल्कि संयम, सहनशीलता और प्रेम का आदर्श भी हैं।
यह आरती विशेष रूप से सोमवार, तीज-हरतालिका, नवरात्रि तथा नित्य देवी पूजन में श्रद्धा से गाई जाती है।
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता ।
जय पार्वती माता...॥
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अरिकुल कंटक नासनि, निज सेवक त्राता
जगजननी जगदम्बा, हरिहर गुण गाता ।
जय पार्वती माता...॥
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सिंह को वहान साजे,कुंडल है साथा
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ता था ।
जय पार्वती माता...॥
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सतयुग रूप शील अतिसुंदर,नाम सती कहलाता
हेमाचंल घर जन्मी, सखियाँ संगराता ।
जय पार्वती माता...॥
शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमाचंल स्थाता
सहस्त्र भुजा तनु धरिके, चक्र लियो हाथा ।
जय पार्वती माता...॥
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सृष्टि रूप तुही है जननी, शिव संग रंगराता
नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता ।
जय पार्वती माता...॥
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देवन अरज करत हम, चरण ध्यान लाता
तेरी कृपा रहे तो, मन नहीं भरमाता ।
जय पार्वती माता...॥
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मैया जी की आरती, भक्ति भाव से जो नर गाता
नित्य सुखी रह करके, सुख संपत्ति पाता ।
जय पार्वती माता...॥
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जय पार्वती माता, जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता ।
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता ।
जय पार्वती माता...॥
इस आरती के माध्यम से भक्त माता पार्वती से जीवन में शुभ फल, संतुलन और पारिवारिक सुख की कामना करता है।
माता को शत्रु-नाशिनी और सेवकों की रक्षक बताकर यह संदेश दिया गया है कि उनकी कृपा से सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
आरती में माता के सती, पार्वती और शक्ति रूपों का उल्लेख यह दर्शाता है कि वे सृष्टि की मूल जननी हैं।
भक्त जब श्रद्धा और भक्ति भाव से उनका स्मरण करता है, तब उसके मन का भ्रम दूर होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
नियमित रूप से “जय पार्वती माता” आरती का पाठ करने से मन में धैर्य, वैवाहिक जीवन में सौहार्द और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।