जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे...
“ॐ जय नरसिंह हरे” भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की अत्यंत प्रभावशाली आरती मानी जाती है।
नरसिंह भगवान को भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए स्तंभ से प्रकट हुए उग्र एवं करुणामय अवतार के रूप में स्मरण किया जाता है।
इस आरती में भगवान के अद्भुत, अकल्पनीय और धर्मरक्षक स्वरूप का वर्णन है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा को लांघ सकते हैं।
नरसिंह तत्त्व का मूल भाव है—अहंकार और अधर्म का संहार तथा भक्ति की विजय।
यह आरती विशेष रूप से नरसिंह जयंती, एकादशी, वैष्णव उपासना तथा संकट-निवारण की साधना में श्रद्धा से गाई जाती है।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे ।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जनका ताप हरे ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी ।
अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी ।
दास जान आपनायो, दास जान आपनायो, जनपर कृपा करी ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे ।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
इस आरती के माध्यम से भक्त नरसिंह भगवान से भय, अन्याय और आंतरिक दुर्बलताओं के नाश की प्रार्थना करता है।
स्तंभ-विदारण और हिरण्यकशिपु-वध का प्रसंग यह सिखाता है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है।
आरती में यह भाव प्रकट होता है कि भगवान अपने भक्तों को केवल बचाते ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनाकर संरक्षण प्रदान करते हैं।
जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ नरसिंह भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन में साहस, धर्मनिष्ठा और आत्मविश्वास का विकास होता है।
नियमित रूप से “ॐ जय नरसिंह हरे” आरती का पाठ करने से मन में निर्भयता, संकटों से मुक्ति और ईश्वर पर अटूट विश्वास की प्राप्ति होती है।
🙏 नरसिंह भगवान जी की आरती 🙏