जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी...
“ॐ जय जगदानन्दी” माँ नर्मदा के आनंददायिनी, पावन और मोक्षदायिनी स्वरूप की अत्यंत प्रसिद्ध आरती मानी जाती है।
माँ नर्मदा को रेवा, शिवकन्या और जगत को शांति व आनंद प्रदान करने वाली दिव्य नदी-देवी के रूप में श्रद्धा से पूजित किया जाता है।
इस आरती में माँ नर्मदा के शैव–वैष्णव स्वरूप का सुंदर समन्वय दिखाई देता है, जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव—तीनों से उनका आध्यात्मिक संबंध दर्शाया गया है।
नर्मदा तत्त्व का मूल भाव है—आत्मिक शुद्धि, निरंतर प्रवाह और भक्ति के साथ जीवन में संतुलन।
यह आरती विशेष रूप से नर्मदा जयंती, नर्मदा परिक्रमा, स्नान-दान पर्वों तथा नित्य नदी-स्मरण में श्रद्धा से गाई जाती है।
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हरि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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देवी नारद सारद तुम वरदायक, अभिनव पदण्डी ।
सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि... शारद पदवाचन्ती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वाद्यन्ती ।
झुमकत-झुमकत-झुमकत, झननन झमकत रमती राजन्ती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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देवी बाजत ताल मृदंगा, सुर मण्डल रमती ।
तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान, तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी ।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा शंकर तुम भट मेटन्ती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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मैयाजी को कंचन थार विराजत, अगर कपूर बाती ।
अमर कंठ में विराजत, घाटन घाट बिराजत, कोटि रतन ज्योति ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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मैयाजी की आरती, निशदिन पढ़ गावरि, हो रेवा जुग-जुग नरगावे,
भजत शिवानन्द स्वामी जपत हरि नंद स्वामी मनवांछित पावे।
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
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ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हरि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी ।
इस आरती के माध्यम से भक्त माँ नर्मदा से मन की शांति, पापों के क्षय और जीवन में आनंद की प्राप्ति की प्रार्थना करता है।
आरती में संगीत, वाद्य और देव-गणों के स्तवन का उल्लेख यह दर्शाता है कि माँ नर्मदा की धारा स्वयं आनंद और भक्ति का स्वरूप है।
माँ नर्मदा को सकल भुवन में विराजमान बताकर यह संकेत दिया गया है कि उनका प्रवाह केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है।
जो भक्त श्रद्धा, नियम और पवित्र भाव से माँ नर्मदा का स्मरण करता है, उसके जीवन से अशांति और क्लेश का क्षय होता है।
नियमित रूप से “ॐ जय जगदानन्दी” आरती का पाठ करने से मन की निर्मलता, कर्मों की शुद्धि और आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।