श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी...
“श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी” श्री ललिता त्रिपुरसुन्दरी की अत्यंत दिव्य एवं दार्शनिक आरती मानी जाती है।
श्री ललिता माता को श्रीविद्या परंपरा में परम शक्ति, राजराजेश्वरी और त्रिलोक की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजित किया जाता है।
इस आरती में माता के करुणामयी, अमृत-वर्षिणी और पाप-नाशिनी स्वरूप का वर्णन है।
त्रिपुरेश्वरी का अर्थ है—तीनों अवस्थाओं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति) और तीनों लोकों पर शासन करने वाली चेतना।
यह आरती विशेष रूप से श्रीचक्र उपासना, देवी साधना, नवरात्रि तथा शाक्त परंपरा के पूजन में श्रद्धा से गाई जाती है।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी । राजेश्वरी जय नमो नमः ॥
करुणामयी सकल अघ हारिणी । अमृत वर्षिणी नमो नमः ॥
जय शरणं वरणं नमो नमः । श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥
अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी । खल-दल नाशिनी नमो नमः ॥
भण्डासुर वधकारिणी जय माँ । करुणा कलिते नमो नम: ॥
जय शरणं वरणं नमो नमः । श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥
भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी । शरण गति दो नमो नमः ॥
शिव भामिनी साधक मन हारिणी । आदि शक्ति जय नमो नमः ॥
जय शरणं वरणं नमो नमः । जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः ॥
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी । राजेश्वरी जय नमो नमः ॥
इस आरती के माध्यम से भक्त श्री ललिता माता से भव-भय के नाश, कष्टों की निवृत्ति और आत्मिक शांति की प्रार्थना करता है।
माता को भण्डासुर-वधकारिणी कहकर यह दर्शाया गया है कि वे अहंकार, अज्ञान और आसुरी प्रवृत्तियों का संहार करती हैं।
आरती में राजेश्वरी और आदि शक्ति के रूप में माता का स्मरण यह संकेत देता है कि समस्त सृष्टि उनकी ही लीला है।
जो साधक श्रद्धा, अनुशासन और शुद्ध भाव से उनकी शरण ग्रहण करता है, उसके जीवन में संतुलन और विवेक का उदय होता है।
नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से साधक में आत्मबल, स्थिरता और आध्यात्मिक जागरण की अनुभूति होती है।
🙏 श्री ललिता माता की आरती 🙏