जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा...
“ॐ जय हनुमत वीरा” श्री बालाजी (हनुमान जी) के शौर्य, भक्ति और संकटमोचक स्वरूप की प्रमुख आरती मानी जाती है।
बालाजी जी को पवनपुत्र, अंजनीनंदन और श्रीराम के परम सेवक के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।
इस आरती में उनके बाल्यकाल की अद्भुत लीलाओं से लेकर रामकाज में उनकी अतुल सेवा का वर्णन है।
यह दर्शाया गया है कि बल, बुद्धि और विवेक—तीनों का समन्वय हनुमान जी की भक्ति में निहित है।
यह आरती विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती तथा बालाजी धाम के दर्शन-पूजन में श्रद्धा से गाई जाती है।
ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा । संकट मोचन स्वामी, तुम हो रनधीरा ॥
पवन पुत्र अंजनी सूत, महिमा अति भारी । दुःख दरिद्र मिटाओ, संकट सब हारी ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
बाल समय में तुमने, रवि को भक्ष लियो । देवन स्तुति किन्ही, तुरतहिं छोड़ दियो ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
कपि सुग्रीव राम संग, मैत्री करवाई। अभिमानी बलि मेटयो, कीर्ति रही छाई ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
जारि लंक सिय-सुधि ले आए, वानर हर्षाये । कारज कठिन सुधारे, रघुबर मन भाये ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
शक्ति लगी लक्ष्मण को, भारी सोच भयो । लाय संजीवन बूटी, दुःख सब दूर कियो ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
रामहि ले अहिरावण, जब पाताल गयो । ताहि मारी प्रभु लाय, जय जयकार भयो ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
राजत मेहंदीपुर में, दर्शन सुखकारी । मंगल और शनिश्चर, मेला है जारी ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
श्री बालाजी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत इन्द्र हर्षित, मनवांछित फल पावे ॥
ॐ जय हनुमत वीरा..॥
इस आरती के माध्यम से भक्त श्री बालाजी से जीवन के संकटों के निवारण, साहस और धैर्य की कामना करता है।
लंका दहन, संजीवनी लाना और अहिरावण वध जैसे प्रसंग सेवा, पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक हैं।
आरती यह संदेश देती है कि सच्चा वीर वही है जो अहंकार से रहित होकर ईश्वर के कार्य में स्वयं को समर्पित करे।
जो भक्त श्रद्धा और नियम से बालाजी का स्मरण करता है, उसके जीवन से भय, बाधाएँ और नकारात्मकता दूर होती हैं।
नियमित रूप से “ॐ जय हनुमत वीरा” आरती का पाठ करने से आत्मविश्वास, मानसिक दृढ़ता और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
🙏 श्री बालाजी जी की आरती 🙏